Gorakhpur Industrial Development Authority (GIDA)
गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) गोरखपुर

नागरिक अधिकार पत्र

उद्देश्य एवम् कार्य
पूर्वांचल में सुनियोजित औद्योगिक विकास को सुनिश्चित करने हेतु उत्तर प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 1989 में उ0 प्र0 औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 के अन्तर्गत ‘‘गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा)’’ का गठन किया गया। गीडा का कार्य क्षेत्र जिला-गोरखपुर की तहसील-सदर एवं सहजनवाॅ मे राष्ट्रीय राजमार्ग सं0-28 (गोरखपुर-लखनऊ मुख्य मार्ग) पर ग्राम-नौसढ़ से शुरु होकर सीहापार क्रासिंग तक निर्धारित किया गया है। उ0प्र0 शासन द्वारा गोरखपुर के 76 राजस्व ग्रामों को इस योजना के लिए विनियमित क्षेत्र के रुप में अधिसूचित किया गया है। योजना हेतु भूमि का अर्जन समझौते अथवा भूमि अध्याप्ति अधिनियम 1894 के अन्तर्गत किया जाता है। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की विकास योजना 1992-2012 के अन्तर्गत लगभग 10 हजार एकड़ भूमि वर्ष-2012 तक अधिग्रहित कर समग्र अवस्थापना सुविधाओं के साथ विकसित की जानी प्रस्तावित थी। जिसके अनुसार विकास योजना को 23 सेक्टरों में विभक्त किया गया है, जिसमे 14 सेक्टर आवासीय, 7 सेक्टर औद्योगिक एवं 1 सेक्टर व्यवसायिक एवं 1 सेक्टर मिश्रित उपयोग हेतु प्राविधानित है। वर्तमान में गीडा विकास योजना 2012-2032 तैयार करायी जा रही है। गीडा का मुख्यालय सिविल लाइन्स, गोरखपुर मे स्थित है तथा साइट कार्यालय गीडा के सेक्टर संख्या-15 में स्थापित है। गीडा का कार्य एवं दायित्व मुख्य रूप से उ0प्र0 औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 के प्राविधानों केे अन्तर्गत कार्य करना है। उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु योजना क्षेत्र में यथा आवश्यक मूलभूत सुविधाएं जैसे सड़क, ड्रेनेज, विद्युत आपूर्ति, जलापूर्ति आदि आवश्यक सुविधाओ का विकास कर आवेदकों को भूमि आवंटित की जाती है। गीडा द्वारा मुख्य रुप से निम्न कार्य किये जाते है:- ऽ उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 के अन्तर्गत समझौते अथवा भूमि अर्जन अधिनियम-1894 के अधीन भूमि अर्जित करना। ऽ औद्योगिक विकास क्षेत्र के लिए योजनाएं तैयार करना। योजनानुसार औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय, संस्थागत एवं व्यवसायिक प्रयोजनों के लिए स्थलों का सीमांकन एवं विकास करना। उक्त प्रयोजनों के लिए सुविधाओं की व्यवस्था करना। ऽ अवस्थापना सुविधाओं (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का विकास करना। भूखण्डों का आवंटन (पट्टे पर) व भूखण्डों का अन्तरण करना। ऽ भवनों के परिनिर्माण तथा उद्योगों की स्थापना को विनियमित करना और क्षेत्र में औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय, संस्थागत या किसी अन्य विनिर्दिष्ट प्रयोजन को निर्धारित करना जिसके लिए किसी विशिष्ट स्थल या प्लाट का उपयोग किया जाना।

  1. उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 के अन्तर्गत समझौते अथवा भूमि अर्जन अधिनियम-1894 के अधीन भूमि अर्जित करना।

  2. औद्योगिक विकास क्षेत्र के लिए योजनाएं तैयार करना। योजनानुसार औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय, संस्थागत एवं व्यवसायिक प्रयोजनों के लिए स्थलों का सीमांकन एवं विकास करना। उक्त प्रयोजनों के लिए सुविधाओं की व्यवस्था करना। अर्जित करना।

  3. अवस्थापना सुविधाओं (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का विकास करना। भूखण्डों का आवंटन (पट्टे पर) व भूखण्डों का अन्तरण करना।

  4. भवनों के परिनिर्माण तथा उद्योगों की स्थापना को विनियमित करना और क्षेत्र में औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय, संस्थागत या किसी अन्य विनिर्दिष्ट प्रयोजन को निर्धारित करना जिसके लिए किसी विशिष्ट स्थल या प्लाट का उपयोग किया जाना।

गीडा के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की शक्तियाॅं एवं कर्तव्य गीडा के परिचालन हेतु प्राधिकारी द्वारा समस्त वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार मुख्य कार्यपालक अधिकारी को प्रतिनिधानित है। सामान्यतः अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी कार्यालय अध्यक्ष के रुप में कार्य करते हंै। मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा कतिपय वित्तीय/प्रशासनिक अधिकार अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी को प्रतिनिधानित किये जाते है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी की सहायता हेतु गीडा का कार्य विभिन्न अनुभागों मे विभक्त किया गया है। ये अनुभाग निम्न है:-

1-स्थापना, 2-भूमि अधिग्रहण, 3-वित्त, 4-भण्डार, 5-सूचना एवं जन सम्पर्क, 6-अभियंत्रण 7-विधि, 8-उद्योग, 9-सम्पत्ति, 10-उद्यान, 11-कम्प्युटर, 12-अनुरक्षण, 13-नियोजन।

प्राधिकरण में निर्णय लेने में अपनायी जाने वाली प्रक्रिया का विवरण उ0 प्र0 औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 के अन्तर्गत गीडा प्राधिकारी बोर्ड का गठन किया गया है जिसके पदेन अध्यक्ष औद्योगिक विकास आयुक्त एवं प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास, उ0 प्र0 शासन है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी गीडा, प्राधिकारी के सदस्य सचिव हैं। नीतिगत निर्णय हेतु शासन द्वारा तय नीतियों, दिशा निर्देशों एवं इस क्षेत्र विशेष में आवश्यकता के अनुरुप विभिन्न मुद्दों पर प्रस्ताव प्राधिकारी बोर्ड की बैठक में निर्णयार्थ प्रस्तुत किये जाते हैं जिस पर प्राधिकारी द्वारा निर्णय लिया जाता है। कतिपय नीति सम्बन्धी मामले यथा आवश्यकतानुसार शासन को भी निर्णय/मार्ग दर्शन हेतु संदर्भित किये जाते है जिन पर शासन के निर्णय/दिशा निर्देशों के तहत कार्यवाही की जाती है। जिन प्रकरणों में केन्द्र सरकार के स्तर से कार्यवाही आवश्यक होती है उन पर कार्यवाही हेतु राज्य सरकार के माध्यम से केन्द्र सरकार को प्रस्ताव प्रेषित किये जाते है। शासन एवं प्राधिकारी द्वारा निर्धारित नीतियों/निर्णयों के परिप्रेक्ष्य में क्रियान्वयन मुख्य कार्यपालक अधिकारी/अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी/निचले स्तर के अधिकारियों द्वारा किया जाता है। प्रत्येक अनुभाग में कार्यरत वरिष्ठतम अधिकारी उस अनुभाग का प्रभारी होता है, जो अपने अधीनस्थ कनिष्ठ अधिकारी /कर्मचारियों की सहायता से विभिन्न कार्यो का सम्पादन करता है।

गीडा में गठित बोर्ड/समितियाॅ ं मुख्यतः निम्नानुसार हैं:-

1- गीडा प्राधिकारी बोर्ड, 2- गीडा उद्योग बन्धु, 3-काॅस्टिंग कमेटी, 4-भूमि अधिग्रहण हेतु स्थल चयन समिति। 5-भू-आवंटन समिति। अन्य प्रकरणों पर परामर्श/संस्तुति हेतु यथाआवश्यक गीडा के तथा अन्य वाह्य विभागों के अधिकारियों/विशेषज्ञों को सम्मिलित करते हुये समितियाॅ गठित की जाती है।

गीडा के विभिन्न नियम, विनियम एवं निर्देश, नियमावलियाॅं तथा अभिलेखों का विवरण

गीडा में कार्य निस्तारण के लिए समय-समय पर निर्गत नियमो दिशा निर्देश, मैनुअल आदि का निर्धारण उ0 प्र0 शासन स्तर से दिये गये निर्देशों के आधार पर व औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 के प्राविधानों के अनुरूप किया जाता है। गीडा में लागू उक्त नियम/विनियम/प्रक्रियाएं नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यू0 पी0 एस0 आई0 डी0 सी0, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों एवं शासन के उद्योग, आवास व अन्य विभागों के तद्सम्बन्धी नियमों/विनियमों/प्रक्रियाओं के आधार पर स्थानीय आवश्यकताओ के दृष्टिगत तैयार की जाती है। उक्त का अनुमोदन मुख्य कार्यपालक अधिकारी अथवा प्राधिकारी बोर्ड द्वारा किया जाता है। गीडा के विभिन्न योजनाओं यथा, औद्योगिक, संस्थागत, आवासीय, ट्रांसपोर्ट नगर योजना, व्यावसायिक इत्यादि में भूखण्डों के आवंटन हेतु योजनावार नियम/विनियम तैयार कराये गये हैं जो योजना की आवेदन पुस्तिका, आवंटन पत्र एवं अनुबन्ध पत्र/लीजडीड के माध्यम से आवेदकों/आवंटियों को उपलब्ध कराये जाते हैं। गीडा कार्यालय में सम्बन्धित पटल सहायकों के पास भी उक्त की प्रतियाॅ ंअवलोकनार्थ उपलब्ध है। पटल सहायकों द्वारा पुस्तिका में दिये गये निर्देश/नियम जो औद्योगिक क्षेत्र विकास के अन्तर्गत आते है, के अनुसार योजनाओं मे भूखण्डो के आवंटन इत्यादि की कार्यवाही की जाती है। उक्त के अतिरिक्त गीडा क्षेत्र में निर्माण कार्यो यथा भवन/औद्योगिक इकाइयों के निर्माण इत्यादि हेतु बिल्डिंग बाईलाज भी तैयार किया गया है, जिसके अनुसार भवन निर्माण अनुज्ञा एवं विनियमन सम्बन्धी कार्यवाही की जाती है।

गीडा में उपलब्ध अभिलेखों का विवरण

गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में मुख्य रुप से निम्न नियमावलियाॅं/पंजिकायें उपलब्ध है:- 1- आवंटन/अनुबन्ध/लीजडीड इत्यादि सम्बन्धी नियम 2-गीडा भवन निर्माण विनियमावली, 3-सेवा नियमावली, 4-बैठक नियमावली, 5-काॅंस्टिंग नियमावली, 6-भूखण्ड प्लान पंजिका, 7-योजनावार आवंटन पंजिका व स्थायी/अस्थाई लघु उद्योग पंजीकरण पंजिका, 8-कैशबुक, लेजर एवं वित्त/लेखा सम्बन्धी अभिलेख, 9-भण्डार सम्बन्धी विभिन्न पंजिकाये 10-अधिकारियों/कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं एवं अभिलेख 11-आवंटन/लीजरेन्ट/मेन्टीनेन्स चार्ज सम्बन्धी अभिलेख 12-माप पुस्तिकाएं 13-मानचित्र स्वीकृत पंजिका।

प्रशासन सम्बन्धी नीतियों के निर्धारण हेतु जन साधारण द्वारा दिये गये प्रत्यावेदन/परामर्श पर कार्यवाही हेतु उपलब्ध प्रक्रिया का विवरण।

 

गीडा एवं मण्डल स्तर पर शासन द्वारा उद्योग बन्धु का गठन किया गया है जिसकी नियमित बैठक क्रमशः मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं मण्डलायुक्त गोरखपुर की अध्यक्षता में होती है। बैठकों के माध्यम से उद्योग स्थापना मे आने वाली समस्याओं/सुझावों पर सम्यक विचारोपरान्त कर कार्यवाही की जाती है। इसके अतिरिक्त विभिन्न समूहों जैसे ट्रांसपोर्ट नगर के आवंटियों के साथ, टेक्सटाइल उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ पृथक-पृथक बैठकें कर उनकी समस्याओ ंका निदान किया जाता है तथा उनके परामर्श पर सक्षम अधिकरी द्वारा कार्यवाही की जाती है। भूमि अधिग्रहण से प्रभावित व्यक्तियों की समस्याओं/ सुझावों के निस्तारण/कार्यवाही हेतु समय-समय पर उच्चाधिकारियों के साथ प्रभावित व्यक्तियो ंकी बैठकें करायी जाती है। उक्त के अतिरिक्त विभिन्न गोष्ठियों/सेमीनार आदि के माध्यम से भी जन सामान्य से परामर्श लिया जाता है तथा उस पर यथोचित कार्यवाही की जाती है। जिन बिन्दुओं पर शासन से हस्ताक्षेप/कार्यवाही अपेक्षित होती है उसका विवरण शासन के औद्योगिक विकास विभाग को अथवा उसके माध्यम से अन्य सम्बन्धित विभागों को संदर्भित कर कार्यवाही की जाती है।

हमारी प्रतिबद्धता

गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) अपनी सम्पत्ति के प्रत्येक आवंटी के प्रति निम्नवत् वचनबद्ध हैं:- 1-सत्यनिष्ठा एवम् ईमानदारी के साथ निष्पक्ष, त्वरित एवम् सौजन्यपूर्ण सेवा, उचित मूल्य पर उच्च कोटि का विकास एवम् निर्माण कार्य कराने का प्रयास। 2-प्राधिकरण के समस्त क्रिया-कलापो मे पारदर्शिता एवम् समयबद्धता का प्रतिपालन। 3-समान प्रकरणों में प्रार्थना पत्रों के स्वीकृत या अस्वीकृत करने के आधार तथा कार्य संचालन एवम् औचित्य के सम्बन्ध में सम्बन्धित को अवगत कराना। 4-प्राधिकरण द्वारा अवधारित की जाने वाली नीतियों के विषय मे नियमानुसार नागरिकों को सूचना देना।

सूचना का अधिकार

गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) अपने उपभोक्ताओ को सभी प्रकार की सूचना कार्यालय दिवस को निम्नवत् प्रकार उपलब्ध कराएगा:-

1-विभागीय कार्यवाहियों, अनुशासनिक कार्यवाहियो एवम् विधिक कारणों से गोपनीय पत्राचार/सूचना के अलावा अन्य सभी अपने से सम्बन्धित सूचनाएं जन सूचना अधिकारी से नियमानुसार कार्यवाही करके कार्यालय अवधि के अन्दर प्राप्त कर सकेंगे। 2-समय-समय पर भूमि विकास, विन्यास मानचित्र एवम् भवन मानचित्र स्वीकृति आदि से सम्बन्धित विधियों/नियमों/आदेशो ंएवम् निर्देशों की मार्गदर्शक पुस्तिका उचित मूल्य पर प्राधिकरण से नियमानुसार प्रत्येक नागरिक क्रय कर सकता है। 3-प्राधिकरण द्वारा संचालित की जाने वाली योजनाओं/संचालित योजनाओं के अवशेष सम्पत्तियों के निस्तारण हेतु विज्ञप्ति स्थानीय समाचार पत्रों में जन साधारण को सूचित करने हेतु समय-समय पर दी जायेगी। 4-प्राधिकरण के विभिन्न कार्य संचालन के लिए वांछित अभिलेखों के प्रपत्र सामान्य मूल्य पर उपलब्ध हंै। 5-प्राधिकरण, समाचार पत्रो के माध्यम से मुख्य योजना/निर्णयों जैसे रिलीफ स्कीम, आवासीय योजना आदि के विषय में जन सामान्य के लाभ हेतु सूचित करता रहेगा। 6-प्राधिकरण में नागरिकों को सूचना तथा मार्ग दर्शन जन सूचना अधिकारी से सम्पर्क करने पर उपलब्ध कराया जायेगा। 7-जनसाधारण को इन्टरनेट/वेबसाइट पर भी सूचना/अन्य विवरण अतिशीघ्र उपलब्ध करायी जायेगी।

शिकायतों का निस्तारण

1- प्राधिकरण का प्रयास होगा कि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की शिकायत का अवसर प्राधिकरण से न मिले किन्तु यदि शिकायतों का निराकरण/समाधान निचले स्तर पर नहीं हो पा रहा है तो उपभोक्ता अपनी शिकायत के निराकरण/समाधान हेतु विभिन्न अनुभागों के अनुभाग प्रभारी से सम्पर्क कर सकते हैं। 2- गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण में नागरिकों की शिकायतो के समयबद्ध निराकरण/समाधान हेतु शिकायत पुस्तिका उपलब्ध रहेगी जिसमें वे अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। 3- लोक शिकायतों की सुनवाई निराकरण हेतु कार्यालध्यक्ष प्रत्येक कार्य दिवस में पूर्वान्ह 10.00 से अपरान्ह 12.00 बजे तक कार्यालय में उपलब्ध रहेंगे। 4- प्राधिकरण के आवंटियों के अन्य विभागों में स्वीकृतियों /विवादग्रस्त एवम् पेंचीदे मामलों/समस्याओं के समाधान हेतु जिलाधिकारी/मुख्य कार्यपालक अधिकारी की अध्यक्षता मे ंआयोजित उद्योग बंधु के अन्तर्गत प्रत्येक माह बैठक में सुनवाई कर समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।

उ0प्र0 औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम-1976

धारा-8ः औद्योगिक क्षेत्र में विकास कार्यो के लिए गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण उचित निर्देश निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में निर्देश जारी करेगी, जो सभी को मान्य होगा।

धारा-9ः किसी भी व्यक्ति/संस्था द्वारा औद्योगिक क्षेत्र के अन्तर्गत निर्माण बिना गीडा प्राधिकरण के अनुमति के नहीं करेगा और न ही धारा-9 (2) में जारी निर्देशों का उल्लंघन करेगा।

धारा-10ः यदि गीडा प्राधिकरण यह पाता है कि कोई भी होने वाला निर्माण उसके उद्देश्यों या दिये जाने वाली सुविधाओं के विरूद्ध है, तो सम्बन्धित व्यक्ति को नोटिस देगा तथा उक्त नोटिस में दिये गये निर्देशों का पालन उक्त व्यक्ति को करना होगा।

धारा-11ः गीडा प्राधिकरण शासन के अनुमति के उपरान्त अपने क्षेत्र में उपलब्ध कराने वाली सुविधाओं पर टैक्स अवधारित कर सकता हेै, जो उक्त स्थल के बाजारी मूल्य का एक प्रतिशत प्रतिवर्ष से अधिक नहीं होगा।

धारा-12ः उ0प्र0 नगर नियोजन एवम् विकास अधिनियम-1973 के अध्याय-7 व धारा-30,32,40,41,42,43,44,45,46,47,49,50,51,53 व 58 पूर्ण रूप से इस प्राधिकरण मे भी प्रभावी होंगे।

धारा-13ः यदि कोई व्यक्ति जो किसी स्थल को अपने पक्ष में स्थानान्न्तरित कराता है और भुगतान समय से नहीं देता है तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी उक्त बकाया धनराशि के अतिरिक्त उक्त धनराशि के बराबर तक की पेनाल्टी अवधारित करके बकाया वसूल सकता है।

धारा-14ः यदि कोई व्यक्ति स्थानान्तरण मूल्य या कोई किश्त समय से नहीं देता हैे और किसी नियम इत्यादि का उल्लंघन करता है तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी उक्त स्थल का पुनः कब्जा ले सकता है और जमा रकम पूर्ण रूप से या उसका कुुछ भाग जब्त कर सकता है।

धारा-15ः यदि कोई व्यक्ति धारा-8 मे जारी किसी निर्देशों या किसी नियमों व इस अधिनियम के प्राविधानों का उल्लंघन करता है, तो सजा होने पर रू0 5000 तक का दण्ड उस पर लगाया जा सकता है और यदि उक्त उल्लंघन जारी रहता है तो उल्लंघन के जारी होने तक रू0 100 प्रतिदिन के हिसाब से दण्ड बढ़ाया जा सकता है।

धारा-16ः किसी भी जांच के लिए जैसे-भवन बनाने की स्वीकृति/ अस्वीकृति होना, भवन का निर्माण स्वीकृति के अनुसार होना, कार्यो की गुणवत्ता पर ध्यान देना या वह अन्य सभी कार्य जिसमें सही व (म्ििपबपमदज) प्रशासन के लिए आवश्यक हो, मुख्य कार्यपालक अधिकारी किसी अधिकारी के माध्यम से निरीक्षण करा सकता है।

धारा-17ः शासन द्वारा नोटिफिकेशन की तिथि से यदि किसी क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र घोषित किया गया है, को उक्त क्षेत्र पर यदि गीडा विकास योजना या क्षेत्रीय विकास योजना पूर्व से प्रभावी है, तो उस क्षेत्र पर उ0प्र0 नगर नियोजन एवम् विकास अधिनियम-1973 व अन्य प्रादेशिक अधिनियम प्रभावी नहीं होंगे।

विकास कार्य/निर्माण हेतु प्रमुख नियम

भवन निर्माण नियमावली 2008 के मुख्य अंश निम्न प्रकार हैं:-

1- गीडा योजना के विनियमित क्षेत्र में 76 राजस्व ग्राम अधिसूचित हुए हैं। गीडा विकास क्षेत्र के अन्तर्गत सुनियोजित विकास हेतु गीडा से मानचित्र स्वीकृत करा कर ही निर्माण कार्य करें। प्रस्तावित निर्माण हेतु मानचित्र की प्रस्तुत की जाने वाली 5 प्रतियां प्राधिकरण द्वारा अधिकृत/अधिकार प्राप्त मानचित्रक/अभियन्ता/ वास्तुविद द्वारा तैयार की गयी हों ,स्वीकार होंगी।

2- 100 वर्ग मीटर से अधिक व 300 वर्ग मीटर तक आवासीय भवनों के निर्माण, पुनर्निर्माण एवम् जीर्णोद्वार के लिए भी भवन मानचित्र दाखिल किये जाने पर इस प्रतिबन्ध के साथ स्वतः स्वीकृत माने जायेंगे कि अर्हवास्तुविद द्वारा तैयार भवन मानचित्र पर यह प्रमाण पत्र अंकित हो कि प्रस्ताव/पुनर्निर्माण गीडा विकास योजना एवम् बाई लाज के अनुसार

3- नगर के नये विकासशील क्षेत्रों के विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित कालोनियो के आवासीय श्रेणी के 300 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल के मानचित्र पर स्वीकृति आवश्यक होगी जो 30 दिन की अवधि में अन्तिम रूप से निस्तारित न होने पर स्वतः स्वीकृत मानी जायेगी।

4- एकल आवासीय भवन/ग्रुप हाउसिंग की स्वीकृति अवधि 5 वर्ष है। तत्पश्चात एक-एक वर्ष के 3 नवीनीकरण अनुमन्य हैं।

5- विकास अनुज्ञा हेतु प्रस्तुत मानचित्र सही तथ्यों ,अभिलेखो ं एवम् नियमो के अधीन ही प्रस्तुत करें अन्यथा यह पाये जाने पर कि प्रस्तुत मानचित्र तथ्यो को छुपाकर, धोखे में रखकर अथवा गलत तथ्यों के आधार पर स्वीकृत करा लिया गया है तो ऐसी दशा में सुनवाई का अवसर देते हुये मानचित्र अस्वीकृत किया जा सकता है। प्रत्येक व्यक्ति/संस्था जिसे प्राधिकरण द्वारा निर्माण की अनुज्ञा दी जा चुकी है वह स्वीकृत मानचित्र के अनुसार निर्माण कराकर प्राधिकरण को सूचित करेगा तथा पूर्णता प्रमाण पत्र गीडा द्वारा तीन माह के अन्दर नहीं दिया जाता है तो यह समझा जायेगा कि निर्माणकर्ता को पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है। व्यवसायिक निर्माण में कोई व्यक्ति/संस्था तब तक व्यवसाय नहीं कर सकेगा जब तक कि गीडा से पूर्णता प्रमाण पत्र न प्राप्त कर लें। 6- पंजीकरण परिवार/रक्त सम्बन्ध के आधार पर एक से अधिक या संयुुक्त नाम से किया जा सकेगा।

7- प्रत्येक पंजीकृत व्यक्ति को प्राधिकरण भूखण्ड/भवन देने के लिए बाध्य नहीं है।

प्राधिकरण से भूखण्ड/भवन प्राप्त करने की प्रक्रिया/पात्रताः-

1- आवेदक भारत का नागरिक हो। 2- आवेदन जमा करने की तिथि पर आवेदक वयस्क हो। 3- पंजीकरण धनराशि गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण के नाम सीधे योजना के लिये निर्धारित बैंक में जमा कराई जायेगी। 4- औद्योगिक योजना में भूखण्डों का आवंटन भूखण्डों की उपलब्धता एवम् मांग के अनुसार नियमानुसार किया जायेगा। आवासीय एवं ट्रांसपोर्ट नगर योजना में उपलब्ध भूखण्डो ंका आवंटन लाटरी द्वारा किया जायेगा। व्यवसायिक भूखण्डों का आवंटन सील्ड बिड (निविदा) के द्वारा किया जायेगा।

पंजीकरण धनराशि

औद्योगिक नगर की योजनाओं में भूखण्डों के पंजीकरण की राशि रू0 10000.00 (1000 वर्गमीटर तक) तथा उससे अधिक रू0 10000 प्रति 1000 वर्गमीटर तथा आवासीय भवनों /भूखण्डों एवं ट्रांसपोर्ट नगर योजना के भूखण्डों की पंजीकरण धनराशि विज्ञापन के अनुसार होगी। संस्थागत क्षेत्र की योजनाओं में भूखण्डों के पंजीकरण की राशि रू0 400000.00 (प्रति 4000 वर्गमीटर) प्रति एकड़ निर्धारित की गयी है।

4- पंजीकरण हेतु धनराशि एवम् आवंटन हेतु आवेदन पत्र जमा करने की प्रक्रिया

विज्ञापन प्रकाशन के उपरान्त इच्छुक आवेदक प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मूल्य पर पंजीकरण पुस्तिका क्रय कर उसमें संलग्न आवेदन पत्र को पूर्ण रूप से भरकर पंजीकरण धनराशि पंजीकरण अवधि के अन्दर जमा करेंगे।

5-आरक्षण

प्राधिकरण की योजना के अन्तर्गत विकसित भवनों/भूखण्डों में शासनादेशों के अनुसार आरक्षण प्रदान किया जायेगा:-

आरक्षित श्रेणी के अन्तर्गत आने वाले प्रार्थियों के लिए अन्य शर्ते यथावत रहेगी। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के आवेदकों को आरक्षण सम्बन्धी दावेदारी हेतु सक्षम अधिकारी का प्रमाण पत्र प्रार्थना पत्र के साथ प्रस्तुत करना होगा। आरक्षित श्रेणी के आवेदकों द्वारा भूखण्ड हेतु आवेदन न किये जाने की दशा में भूखण्ड सामान्य श्रेणी के आवेदकों को आवंटित कर दिये जायेगें।

6-आवंटी को भूखण्ड/भवन का कब्जा देने की प्रक्रिया

1-भूखण्ड/भवन की भूमि मौके के माप के अनुसार प्राधिकरण द्वारा कब्जा दिया जायेगा।

2-भूखण्ड/भवन का कब्जा अनुमानित मूल्य की 10 प्रतिशत, 25 प्रतिशत यथास्थिति धनराशि जमा करने के उपरान्त दिया जायेगा धनराशि भूखण्ड/भवन के आवंटन के एक माह के अन्दर जमा करनी होगी। कब्जे से पूर्व पूर्ण स्टैम्प पर अनुबन्ध पंजीकृत कराना अनिवार्य है ।

3-आवंटी को निर्धारित प्रपत्र पर देय स्टैम्प पेपर पर विलेख निष्पादित करने होंगे। विलेख सम्बन्धी समस्त व्यय जैसे-स्टैम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस, लिखाई छपाई मानचित्र आदि तैयार करने का भार आवंटी को वहन करना होगा।

4-औद्योगिक एवं संस्थागत क्षेत्र में कार्नर के भूखण्डों पर भूखण्ड के मूल्य का 5 प्रतिशत कार्नर चार्ज देना होगा तथा 30 मीटर एवम् इससे अधिक चैडी़ सड़क पर स्थित भूखण्डों पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त लोकेशन शुल्क देय होगा।

5-आवासीय एवं ट्रासपोर्ट नगर क्षेत्र में कार्नर के भूखण्डों पर भूखण्ड के मूल्य का 10 प्रतिशत कार्नर शुल्क देना होगा ।

6-आवासीय क्षेत्र में पार्क के सम्मुख भूखण्डों पर भूखण्ड के मूल्य का 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

विभिन्न सेवाओं/कार्यो हेतु सम्पर्क अधिकारी एवम् समय-सारिणी